पृथ्वी की वायुमंडल की परतें – Layers of Earth’s Atmosphere in Hindi

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वायुमंडल क्या है? What is Atmosphere.

पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए गैसों की परत को ही पृथ्वी के वायुमंडल (Earth’s Atmosphere) कहते हैं। यह परत हमें दिखाई नहीं देती, लेकिन हमारे जीवन के लिए सबसे ज़रूरी है। इसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन और जल वाष्प जैसी कई गैसें मिली होती हैं। वायुमंडल की परतें हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन देता है और पौधों को भोजन बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड उपलब्ध कराता है। इसके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव ही नहीं होता।

वायुमंडल की परतें,

Vidyayan Academy में आपका स्वागत है, जहाँ हम CBSE छात्रों के लिए महत्वपूर्ण विषयों को सरल और स्पष्ट रूप में समझाते हैं। इस ब्लॉग में हम जानेंगे पृथ्वी के वायुमंडल की परतों के बारे में, पृथ्वी की वायुमंडल की परतें सूर्य की हानिकारक किरणों से हमारी रक्षा करता है और तापमान को संतुलित बनाए रखता है, ताकि यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड न हो। यही नहीं, वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प बादलों का निर्माण करता है और बारिश लाता है। ध्वनि भी हवा के माध्यम से ही एक जगह से दूसरी जगह पहुँचती है। सबसे बड़ी बात, वायुमंडल हमें उल्कापिंडों से भी बचाता है क्योंकि वे पृथ्वी तक पहुँचने से पहले इसी परत में जलकर नष्ट हो जाते हैं।

यानी सरल शब्दों में कहें तो, वायुमंडल की परतेंपृथ्वी की अदृश्य ढाल है जो हमें सुरक्षित भी रखती है और जीवन जीने के लिए ज़रूरी सारी परिस्थितियाँ भी देती है।

वायुमंडल की संरचना (Structure of Atmosphere)

पृथ्वी का वायुमंडल की परतें कई गैसों का मिश्रण है, जिनमें मुख्य हैं:

  • नाइट्रोजन (N₂) – लगभग 78
  • ऑक्सीजन (O₂) – लगभग 21
  • अन्य गैसें – लगभग 1
    • CO₂ एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, जो पृथ्वी के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन इसकी अधिकता ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है।

वायुमंडल की परतें। Layers of Earth’s Atmosphere in Hindi.

पृथ्वी की वायुमंडल की परतें मुख्य रूप से पाँच प्रमुख परतों में बँटा हुआ है, जो अलग-अलग ऊँचाई और विशेषताओं के आधार पर जानी जाती हैं। सबसे निचली परत क्षोभमंडल (Troposphere) है, जहाँ मौसम से जुड़ी सारी गतिविधियाँ जैसे बारिश, हवा और बादल बनते हैं। इसके ऊपर समताप मंडल (Stratosphere) होता है, जिसमें ओजोन परत पाई जाती है जो हमें सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। तीसरी परत मध्य मंडल (Mesosphere) है, जहाँ अधिकांश उल्कापिंड जलकर नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद आती है तापमंडल (Thermosphere), जहाँ पर तापमान बहुत अधिक होता है और यहीं पर ऑरोरा बोरेलिस (नॉर्दर्न लाइट्स) जैसी अद्भुत घटनाएँ दिखाई देती हैं। सबसे ऊपरी परत बाह्य वायुमंडल (Exosphere) है, जहाँ से वायुमंडल धीरे-धीरे अंतरिक्ष में समाप्त हो जाता है और यहीं पर अधिकांश कृत्रिम उपग्रह परिक्रमा करते हैं।

इन परतों के बीच आयनमंडल (Ionosphere) भी होता है, जो रेडियो तरंगों को परावर्तित करके संचार व्यवस्था को संभव बनाता है। इस तरह वायुमंडल की ये सभी परतें मिलकर पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखती हैं।

आइए समझें पृथ्वी की वायुमंडल की परतें को – वायुमंडल कई परतों में बँटा हुआ है और हर परत की अपनी खास भूमिका है।

  • क्षोभमंडल (Troposphere)
  • समताप मंडल (Stratosphere)
  • मध्य मंडल (Mesosphere)
  • तापमंडल (Thermosphere)
  • बाह्य वायुमंडल (Exosphere)

हमारा YouTube वीडियो देखें – वायुमंडल की परतें आसान भाषा में

अधिक बेहतर समझ के लिए हमारा YouTube वीडियो ज़रूर देखें, जहाँ हमने पृथ्वी की वायुमंडल की परतें को आसान भाषा और उदाहरणों के साथ समझाया है।

क्षोभमंडल (Troposphere)

क्षोभमंडल पृथ्वी की वायुमंडल की परतें में सबसे निचली और सबसे महत्वपूर्ण परत है। यह सतह से औसतन लगभग 12 किलोमीटर तक फैली होती है, हालाँकि इसकी ऊँचाई हर जगह समान नहीं होती—ध्रुवों पर लगभग 8 किलोमीटर और भूमध्य रेखा पर करीब 18 किलोमीटर तक पहुँच जाती है। यही परत हमें जीवन के लिए आवश्यक वायु उपलब्ध कराती है, और इसमें लगभग 99

क्षोभमंडल की सबसे खास बात यह है कि यहाँ ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता जाता है। औसतन यह कमी प्रति किलोमीटर लगभग 6.5°C होती है। इस परत की ऊपरी सीमा को ट्रोपोपॉज़ (Tropopause) कहा जाता है, जो क्षोभमंडल और समताप मंडल के बीच एक संक्रमण क्षेत्र (transition zone) का काम करता है।

यह परत सबसे घनी (densest) है क्योंकि यह ऊपर के वायुमंडल के भार से संकुचित रहती है। इसी घनत्व के कारण अधिकांश हवाई जहाज इसी परत में उड़ते हैं, हालाँकि ऊँचाई पर जाने वाले कुछ जेट विमान ट्रोपोपॉज़ के पास तक उड़ सकते हैं।

क्षोभमंडल का महत्व केवल मौसम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन (energy balance) को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। सूर्य से आने वाली ऊष्मा और सतह से निकलने वाली ऊर्जा का आदान-प्रदान मुख्यतः इसी परत में होता है। यही परत जीवन के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है क्योंकि इसमें तापमान, दबाव और ऑक्सीजन की मात्रा हमारे लिए संतुलित रहती है।

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समताप मंडल (Stratosphere)

समताप मंडल पृथ्वी की वायुमंडल की परतें में दूसरी परत है, जो क्षोभमंडल के ऊपर स्थित होती है। यह लगभग 12 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैली होती है। इस परत को खास तौर पर इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसमें ही ओजोन परत (Ozone Layer) मौजूद है, जो हमें सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है। यही कारण है कि इस परत को अक्सर “पृथ्वी की ढाल” (Earth’s Shield) भी कहा जाता है।

समताप मंडल की एक विशेषता यह है कि इसमें ऊँचाई बढ़ने पर तापमान बढ़ता जाता है। यह क्षोभमंडल से बिल्कुल विपरीत है। इसका कारण यह है कि ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है और इस प्रक्रिया में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे तापमान में वृद्धि होती है।

यह परत आमतौर पर बादल और मौसम संबंधी गतिविधियों से मुक्त रहती है। हालांकि, उच्च अक्षांशों पर सर्दियों के मौसम में कभी-कभी ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल (Polar Stratospheric Clouds – PSCs) दिखाई देते हैं, जिन्हें “मोती जैसे बादल” भी कहा जाता है। ये बादल ओजोन परत के क्षरण (Ozone Depletion) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यही वह परत है जहाँ तक जेट विमान और सुपरसोनिक विमान उड़ान भर सकते हैं। क्षोभमंडल की तुलना में यहाँ की वायु कम घनी और स्थिर होती है, इसलिए विमान यहाँ कम ईंधन की खपत में लंबी दूरी तय कर सकते हैं।

समताप मंडल का महत्व केवल विमानों और ओजोन परत तक ही सीमित नहीं है। यह परत पृथ्वी के जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती है। यदि ओजोन परत क्षतिग्रस्त हो जाए तो पृथ्वी पर जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है क्योंकि हानिकारक UV-B और UV-C किरणें सीधे सतह तक पहुँच जाएँगी।

मध्य मंडल (Mesosphere)

मध्य मंडल पृथ्वी की वायुमंडल की परतें में तीसरी परत है, जो समताप मंडल के ऊपर और तापमंडल (Thermosphere) के नीचे स्थित होती है। यह परत लगभग 50 किलोमीटर से 80 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैली होती है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान लगातार घटता जाता है।

मध्य मंडल का ऊपरी हिस्सा, जिसे मेज़ोपॉज़ (Mesopause) कहा जाता है, पृथ्वी की प्रणाली के भीतर का सबसे ठंडा क्षेत्र माना जाता है। यहाँ का औसत तापमान लगभग -85°C (-120°F) तक पहुँच सकता है। इतनी ठंडक के कारण यह परत जीवन के लिए प्रतिकूल है, लेकिन पृथ्वी के वायुमंडलीय संतुलन में इसकी अहम भूमिका है।

इस परत में मौजूद बहुत कम मात्रा में जलवाष्प कभी-कभी विशेष प्रकार के रात्रि-ज्योतिर्मय बादल (Noctilucent Clouds / Night-Shining Clouds) का निर्माण करते हैं। ये बादल पृथ्वी के वायुमंडल में बनने वाले सबसे ऊँचे बादल हैं और सूर्य के क्षितिज के नीचे होने पर भी चमकते हुए दिखाई देते हैं।

मध्य मंडल का एक और महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि अधिकांश उल्कापिंड (Meteoroids) इसी परत में प्रवेश करने पर घर्षण से जलकर नष्ट हो जाते हैं। रात में आकाश में दिखाई देने वाली “टूटते तारे” (shooting stars) की घटनाएँ दरअसल इसी वायुमंडलीय परत की देन हैं।

वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि से भी मध्य मंडल बेहद दिलचस्प है। हालांकि यहाँ तक पहुँचना कठिन है क्योंकि यह क्षेत्र गुब्बारों (जो समताप मंडल तक ही जा सकते हैं) और उपग्रहों (जो ऊपरी परतों में रहते हैं) दोनों की पहुँच से बाहर होता है। फिर भी, साउंडिंग रॉकेट और विशेष प्रकार के रॉकेट से चलने वाले विमान का उपयोग कर वैज्ञानिक इस परत का अध्ययन करते हैं।

समताप मंडल और मध्य मंडल के बीच की संक्रमण सीमा को स्ट्रेटोपॉज़ (Stratopause) कहा जाता है।

तापमंडल (Thermosphere)

तापमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की चौथी परत है, जो लगभग 80 किलोमीटर से 700 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैली होती है। यह परत पृथ्वी और अंतरिक्ष (Space) के बीच का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र मानी जाती है। इसका निचला हिस्सा आयनमंडल (Ionosphere) कहलाता है, जहाँ सौर विकिरण की तीव्रता के कारण अणु और परमाणु आयनित (Charged) हो जाते हैं। यही कारण है कि यह परत रेडियो संचार और उपग्रह संकेतों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

तापमंडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान भी बढ़ता जाता है। सूर्य से आने वाली प्रबल पराबैंगनी (UV) और एक्स-रे किरणें यहाँ के अणुओं और परमाणुओं को ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे तापमान 2,000 डिग्री सेल्सियस (3,600 °F) तक पहुँच सकता है। हालाँकि, यहाँ वायु का घनत्व इतना कम होता है कि यदि कोई वस्तु या इंसान यहाँ मौजूद हो तो उसे इतनी अधिक गर्मी महसूस नहीं होगी, क्योंकि अणुओं की संख्या बहुत कम है।

इस परत में बादल और जलवाष्प दोनों का अभाव होता है। लेकिन यहाँ पर बनने वाली घटनाएँ बेहद अद्भुत और आकर्षक हैं। सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक घटनाएँ हैं –

ये प्रकाशमय दृश्य तब उत्पन्न होते हैं जब सूर्य से आने वाले आवेशित कण (Charged Particles) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से टकराते हैं और आयनमंडल में अणुओं को उत्तेजित करते हैं।

इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) और कई कृत्रिम उपग्रह तापमंडल की ऊँचाई पर ही परिक्रमा करते हैं। इसलिए यह परत अंतरिक्ष अनुसंधान और संचार तकनीक के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

तापमंडल के ऊपरी हिस्से और बाह्य अंतरिक्ष (Outer Space) के बीच की संक्रमण सीमा को थर्मोपॉज़ (Thermopause) कहा जाता है।

आयनमंडल (Ionosphere)

आयनमंडल पृथ्वी के वायुमंडल का एक विशेष क्षेत्र है, लेकिन यह कोई अलग स्वतंत्र परत (जैसे क्षोभमंडल या समतापमंडल) नहीं है। वास्तव में, आयनमंडल मध्य मंडल (Mesosphere), तापमंडल (Thermosphere) और आंशिक रूप से बहिर्मंडल (Exosphere) के साथ ओवरलैप करता है। यह परत लगभग 50 किलोमीटर से 1,000 किलोमीटर तक की ऊँचाई पर फैली होती है।

आयनमंडल का नाम इसके सबसे महत्वपूर्ण गुण से जुड़ा है—आयन (Ionization)। सूर्य से आने वाली पराबैंगनी (UV) और एक्स-रे किरणें इस परत में मौजूद गैसों को आयनित (Ionize) करती हैं। इसका अर्थ है कि गैसों के परमाणु और अणु इलेक्ट्रॉनों को खोकर या प्राप्त कर आवेशित कण (Charged Particles) में बदल जाते हैं। यही कण आयन (Ions) और इलेक्ट्रॉन्स कहलाते हैं। इसी कारण इसे आयनमंडल कहा जाता है।

आयनमंडल की मुख्य विशेषताएँ

  1. सक्रिय परत – यह परत सूर्य की ऊर्जा पर बहुत निर्भर करती है। दिन के समय सूर्य की किरणों से यह परत अधिक आयनित होती है और फैलती है, जबकि रात में आयनाइजेशन कम हो जाता है और परत सिकुड़ती है।
  2. रेडियो तरंगों का परावर्तन – आयनमंडल एक विद्युत प्रवाहकीय क्षेत्र की तरह कार्य करता है। यह रेडियो तरंगों (विशेषकर शॉर्ट वेव्स) को पृथ्वी पर वापस परावर्तित करता है। इसी कारण हम लंबी दूरी तक रेडियो संचार कर पाते हैं।
  3. संचार के लिए महत्त्वपूर्ण – रेडियो प्रसारण, जीपीएस (GPS), उपग्रह संचार और नौवहन प्रणालियाँ आयनमंडल पर निर्भर करती हैं।
  4. ध्रुवीय प्रकाश (Auroras) – पृथ्वी की वायुमंडल की परतें की ऊपरी हिस्से में आयनमंडल में ही सुंदर ऑरोरा बोरेलिस और ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस दिखाई देते हैं, जो सूर्य से आने वाले आवेशित कणों और पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की परस्पर क्रिया से उत्पन्न होते हैं।

आयनमंडल की परतें

आयनमंडल को उसकी घनत्व और आयनाइजेशन स्तर के आधार पर कई क्षेत्रों में बाँटा गया है:

  • D-परत (60–90 km) – यह दिन के समय सक्रिय रहती है और AM रेडियो तरंगों को अवशोषित करती है।
  • E-परत (90–150 km) – जिसे Kennelly-Heaviside layer भी कहते हैं, यह रेडियो संकेतों को मोड़कर दूर तक भेजने में मदद करती है।
  • F-परत (150–1,000 km) – यह पृथ्वी की वायुमंडल की परतें में सबसे महत्त्वपूर्ण परत है, जो रेडियो तरंगों को परावर्तित करके लंबी दूरी के संचार को संभव बनाती है। दिन के समय यह दो भागों में बँट जाती है (F1 और F2)।

बाह्य वायुमंडल (Exosphere)

बाह्य वायुमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे ऊपरी और अंतिम परत है। यह पृथ्वी की सतह से लगभग 700 किलोमीटर से लेकर 10,000 किलोमीटर तक फैली हुई है। इस परत का ऊपरी सिरा धीरे-धीरे अंतरिक्ष (Outer Space) में बदल जाता है, यानी यह वह क्षेत्र है जहाँ से पृथ्वी की वायुमंडल की परतें समाप्त होकर अंतरिक्ष शुरू होता है।

मुख्य विशेषताएँ

  1. सबसे ऊँची परत – पृथ्वी की वायुमंडल की परतें में यह वायुमंडल की बाहरी सीमा है, जो सूर्य की ओर खुली रहती है और वहीं से पृथ्वी का वायुमंडल सौर वायु (Solar Wind) के साथ मिल जाता है।
  2. अत्यंत विरल (Very Thin) – यहाँ अणु और कण बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए यह गैस की तरह व्यवहार नहीं करती। इसीलिए इसे वैक्यूम जैसे क्षेत्र की तरह माना जाता है।
  3. गैस कणों का एस्केप – इस परत में मौजूद कण (जैसे हाइड्रोजन और हीलियम) इतनी ऊँची गति से चलते हैं कि कई बार ये अंतरिक्ष में निकल (Escape) जाते हैं।
  4. मौसम रहित परत – बाह्य वायुमंडल में न तो बादल होते हैं और न ही मौसम संबंधी गतिविधियाँ। यह पूरी तरह से शांत और शुष्क क्षेत्र है।
  5. ऑरोरा का निचला हिस्सा – हालाँकि मुख्य रूप से ऑरोरा आयनमंडल और तापमंडल में बनते हैं, लेकिन कभी-कभी इनके सबसे निचले हिस्से बाह्य वायुमंडल में भी दिखाई देते हैं।
  6. उपग्रहों का क्षेत्र – पृथ्वी के अधिकतर कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellites), जैसे कि मौसम उपग्रह, जीपीएस उपग्रह और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) इसी परत में परिक्रमा करते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व

  • बाह्य वायुमंडल का अध्ययन अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) को समझने के लिए किया जाता है।
  • उपग्रहों की गति और कक्षा को स्थिर रखने के लिए यहाँ के गैस कणों के घर्षण का अध्ययन जरूरी होता है।
  • यह पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच एक ट्रांजिशन ज़ोन की तरह कार्य करता है।

निष्कर्ष – पृथ्वी की वायुमंडल की परतें

पृथ्वी की वायुमंडल की परतें हमारी सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसकी पाँचों मुख्य परतें — क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, तापमंडल और बहिर्मंडल — अपनी-अपनी विशेषताओं और कार्यों से जीवन को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखती हैं। यही परतें मौसम, जलवायु, संचार और अंतरिक्ष से जुड़े कई वैज्ञानिक कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए वायुमंडल की संरचना को समझना न सिर्फ विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए, बल्कि हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी है।

पृथ्वी के वायुमंडल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ’s)

प्रश्न 1: वायुमंडल क्या है?
उत्तर: वायुमंडल पृथ्वी को घेरे हुए गैसों की परत है, जो जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करती है, तापमान को संतुलित रखती है और हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है।

प्रश्न 2: वायुमंडल की कितनी परतें होती हैं?
उत्तर: पृथ्वी की वायुमंडल की परतें मुख्य रूप से 5 प्रमुख परतों में बँटा है – क्षोभमंडल, समताप मंडल, मध्य मंडल, तापमंडल और बाह्य वायुमंडल। इसके अलावा आयनमंडल भी है, जो अन्य परतों के साथ ओवरलैप करता है।

प्रश्न 3: सबसे निचली परत कौन सी है और इसमें क्या होता है?
उत्तर: सबसे निचली परत क्षोभमंडल (Troposphere) है। यहीं पर बादल बनते हैं, बारिश होती है और मौसम संबंधी सभी गतिविधियाँ होती हैं।

प्रश्न 4: ओजोन परत किस परत में पाई जाती है?
उत्तर: ओजोन परत समताप मंडल (Stratosphere) में पाई जाती है। यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमें बचाती है।

प्रश्न 5: उल्कापिंड वायुमंडल की किस परत में जलकर नष्ट हो जाते हैं?
उत्तर: अधिकांश उल्कापिंड मध्य मंडल (Mesosphere) में प्रवेश करते ही जलकर समाप्त हो जाते हैं।

प्रश्न 6: नॉर्दर्न लाइट्स (Aurora Borealis) किस परत में दिखाई देती हैं?
उत्तर: नॉर्दर्न और सदर्न लाइट्स तापमंडल (Thermosphere) और कभी-कभी बाह्य वायुमंडल (Exosphere) के निचले हिस्से में दिखाई देती हैं।

प्रश्न 7: उपग्रह किस परत में परिक्रमा करते हैं?
उत्तर: अधिकतर कृत्रिम उपग्रह बाह्य वायुमंडल (Exosphere) में परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 8: आयनमंडल का क्या महत्व है?
उत्तर: पृथ्वी की वायुमंडल की परतें में आयनमंडल रेडियो तरंगों को परावर्तित करके पृथ्वी पर संचार व्यवस्था को संभव बनाता है। यह सूर्य से आने वाली ऊर्जा के अनुसार फैलता और सिकुड़ता है।

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